बुधवार, 4 अगस्त 2021

बिना खाना और पानी के 438 दिन वो समुद्र में रहा ज़िंदगी से जंग की कहानी



18 नवंबर 1912 को यह कहानी मेक्सिको

कहानी की शुरुआत होती है 18 नवंबर 1912 को यह कहानी मेक्सिको की है आडोर में रहने वाला एक मछुआरा की है जिसका नाम था जोश सल्वाडोर15 साल से मछली पकड़ने का काम करता था वह दूसरे के नाव को ले जाकर समुंदर में दो-दो तीन-तीन दिन तक मछली पकड़ कर लाता था और फिर उसको मार्केट लाकर बेचता था और उसको 15 साल का तजुर्बा था वह समुद्र में मछलियां पकड़ता था और उसी तजुर्बे के बिना पर एक बार वह समुद्र की लहरों में उतरता है उसको अपने एक दोस्त को साथ लेकर जाना था लेकिन उस दोस्त को कोई काम आ गया और वह जाने से मना कर गया और उसने कहा कि हम कुछ दिन बाद चलेंगे मगर जो सल्वाडोर को पैसे की जरूरत थी घर की तंगी थी जो सल्वाडोर ने अपने दोस्त को छोड़कर एक 20 साल के लड़के को जिसको समुद्र के बारे में जानकारी नहीं थी


23 फुट लंबा और बहुत फ्लैट
नाव लेकर समुद्र उतरा

उसको लेकर वह समुद्र में उतरा और उस 20 साल के लड़के का नाम था कोटोबा अब जो सल्वाडोर और कोटोबा निकल पड़ते हैं नवा लेकर समुद्र की लहरों में जिस नाव को लेकर वह नाव बहुत बड़ा नहीं था 23 फुट लंबा और बहुत फ्लैट और प्लेन नाव था साथ में अपने सामान खाने पीने की इनके पास था 16 गैलन पानी रखा था 70 गैलन गैसोलीन थी इसके अलावा 7हफ्ते मछलियां पकड़ने के लिए सामान एक चाकू था एक मोबाइल फोन था एक जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस था इसके अलावा 1 रेडियो था जिससे वह अपने मालिक से बात कर सकते थे इसकी बैटरी 50% चार्ज थी यह सारी चीजें लेकर वह निकलता है और साथ में 90 किलो बर्फ ताकि मछलियां खराब ना हो मछलियों को उसी में रख लेंगे यह सारे सामान लेकर जोश और कॉर्डोबा मेक्सिको के एल सल्वाडोर से 23 फुट छोटी नौका से मछली पकड़ने के लिए निकल जाते हैं पहले दिन उन्होंने बहुत मछली पकड़ी सही टाइम था इसके बाद दूसरे दिन भी अच्छी खासी मछली पकड़ी अब तक उन्होंने 500 मछलियां पकड़ पकड़ चुके मछलियां पकड़ते पकड़ते यह समुंदर के किनारे से तकरीबन 50 मील दूर थे 50 मील दूर 2 दिन खत्म हो गए थे 21 नवंबर 2012 को वापसी थी और यह किनारे से 50 मील दूर थे



अचानक समुंदर में तूफान आ जाता है

अचानक समुंदर में तूफान आ जाता है तूफान काफी तेज और लहरें काफी ऊंची ऊंची थी जो सल्वाडोर की नवा उस तूफान में फंस जाती है और उसको उस रूट से जिस रास्ते से जाना था वह उस रास्ते से अलग कर देता है और नौका का डायरेक्शन चेंज हो गया था दूर-दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और उसका जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम बंद हो चुका था क्योंकि 2 दिन हो चुके थे अब वह काम नहीं कर रहा था बचाता है उसका फ़ोन जो 50% चार्ज था वह अपने सेट को फोन किया और उसने बताया कि मैं रास्ता भटक गया हूं और मेरा जीपीएस भी खराब हो चुका है और दूर-दूर तक कोई जहाज भी नहीं दिखाई दे रहा है और अचानक फ़ोन भी बंद हो जाता है बैटरी डेड हो जाती है जो सिलवा जोशना अकेले बैठ जाते हैं और धीरे-धीरे वो रास्ते की तलाश में आगे बढ़ते हैं और धीरे-धीरे वो रास्ता भटक जाते हैं रात होती है दिन होता है और 1 दिन और कट जाता है और एक बात अच्छी थी खाने पीने का सामान था फिर तूफान आता है इन लोगों को लगता है कि अब नवा डूब जाएगी और 500 केजी रखी हुई मछली की वजह से तो जान बचाने के लिए उन्होंने यह किया कि जिस चीज के लिए आए थे उसी से पीछा छुड़ाना पड़ा उन्होंने मछलियों को समुद्र में फेंक दिया हालांकि उसमें एक डर था




क्योंकि इतनी सारी मछली एक साथ फेकेंगे तो उनको खाने के लिए शार्क मछली आएगी तो उन्होंने पहले मछली फेंकी फिर गैसोलीन फेंका फिर पानी फेंका और इस तरह पूरे नवा को खाली कर दिया और पानी भी खत्म हो रहा था अब खाना भी खत्म हो गया था करते करते 10 दिन बीत गये पीने का पानी था अब खाना खाने का कुछ नहीं था अब जिंदा कैसे रहें समुंदर में जो पक्षी नवा पर आ कर बैठती थी यह पकड़ कर खाते थे और धीरे-धीरे अपना भूख मिटाते थे इस बीच 10-15 दिनों के बाद इन्होंने देखा की समुद्र में कई जहाज दिखे लेकिन इन्हें तो उनके जहाज दिखते थे मगर उन्हें इनका जहाज नहीं दिखयी देता था क्योंकि 23 फुट नवा और समुंदर में इसके ऊपर छत ना हो छोटी सी नाव है तो कहां से दिखेंगे यह काफी चिल्लाते हेल्प हेल्प मगर उनतक कोई आवाज नहीं पहुच पता धीरे-धीरे 15 से 20 दिन 25 दिन हो गए अब को डूबा की हालात खराब हो रहे थे क्योंकि वह 20 साल का नौजवान था और खाने पीने के लिए कुछ था नहीं तब जो सल्वाडोर ने कहा कि अगर हमें जिंदा रहना तो समंदर का पानी पीना पड़ेगा तो इन्होंने एक तरकीब निकाली कि समुद्र के पानी से पीने से हम जिंदा नहीं रह पाएंगे तो एक काम करते हैं



पक्षियों को कच्चा खाते और अपना पेशाब पीते

कि हम जो पेशाब करेंगे उन्हें हम पिएंगे यह मछली यह पक्षियों को कच्चा खाते और अपना पेशाब पीते ऐसा करते-करते इन्होंने एक महीना 30 दिन गुजारा और यह दोनों की उम्मीद खत्म हो चुकी थी कि हम अपने घर वापस लौट पहुंच जा पाएंगे 30 दिन के बाद अचानक एक सुबह ऐसी आती है जब सुबह कॉर्डोबा की मौत हो चुकी थी जो देखता है बहुत परेशान होता है उसको हिलाता है मगर उठता नहीं बाकी मौत हो चुकी थी 4 दिन तक उसकी लाश को अपने नवा में रखे रहता है और उसी से बात करता है 4 दिन के बाद उसे एहसास हुआ कि कडोबा मर चुका है तो उसने उसकी लाश को नदी में फेंका और एक दिन जब रात को अपने नवा पर लेटा था तो उसे आसमान में गड़गड़ाहट की आवाज सुनिया तो उसे बहुत ही अच्छा लगा कि शायद आज अब मैं पानी पी लूंगा तो उसने जो आइस बॉक्स के लिए डबे ले गया था बर्फ तो सारा फेंक दिया था लेकिन बॉक्स था तो उसको खोल के रख दिया ना कि बारिश होगी तो मैं इसमें बारिश की पानी को इकट्ठा करके पी लूंगा बारिश हुई और पानी इकट्ठा हुआ और इकट्ठे पानी को बहुत बचा के यूज़ किया बीच में कई बार उसने





सोचा कि मैं इस नवा से कूदकर जान दे दो

सोचा कि मैं इस नवा से कूदकर जान दे दो अब उसके पैर हाथ सबकुछ सूजा चुके थे बाल दाढ़ी देखने लायक नहीं थे काफी बढ़ चुके थे और उसको खुद से अब लग रहा था कि अब मैं नहीं बच पाँऊगा और ना ही किसी का चेहरा देख पाऊंगा और यही समुंदर मेरा कब्र बनेगी धीरे धीरे जैसे-जैसे वक्त बढ़ने लगा उसके अंदर यह मायूसी पड़ने लगी कि मैं अब शायद बच नहीं पाऊंगा और वह कमज़ोर होने लगा फिर उसने सोचा कि मैं जब तक ज़िंदा हो लडोगा उसने फिर एक कल्पना की यही नाव मेरा घर है और इसी में मुझे रहना है यही सोचकर वह और हिम्मत जुटाकर रहने लगा एक दिन ऐसा ही वह सोया था हल्की-हल्की नींद में था तो उसे चिड़ियों की चचाने की आवाज सुनाई दी तो उसने धीरे-धीरे आंखें खोली तो उसे लगा कि शायद मैं किसी किनारे पर हूं तो उसने जब देखा उठकर तो सामने टापू दिखा तो काफी खुश हुआ कि मैं तो किनारे पर आ गया हूं लेकिन फिर एक बार उसके साथ किस्मत में मैं जैसे लिखा था कि फिर कुछ ना कुछ होगा जैसे-जैसे उसकी नाव टापू की तरफ जाती थी लहरें उसको गलत डायरेक्शन में घुमा देती थी मगर कैसे-कैसे करके वो टापू पर पहुंचता है और जाकर बेहोश हो जाता है टापू पर यह पहुंचा था


उस टापू का नाम मार्शल आईलैंड था

उस टापू का नाम मार्शल आईलैंड था और यह मार्शल आइलैंड में उस जगह का नाम था पार्टिकल लिवोन और यह न्यूजीलैंड में है इमो और रसूल दोनों पति-पत्नी इस टापू पर आते जाते थे नारियल तोड़ने के लिए और जब वह पहुंचते हैं दोनों तो वह देखते हैं कि एक आदमी अवधा पड़ा हुआ है तो उसको देखकर उसको पलटते हैं और देखते हैं कि ऐसा आदमी जिसके बाल दाढ़ी सब बढ़े हुए हैं और उसको देखकर लग रहा था कि यह काफी दिनों से काफी दूर से आया है जिस दिन यह टापू पर आया था पूरे 438 दिन 14 महीने हो चुके थे वह दोनों एमी और रसल देखकर डर गए थे क्योंकि इसके पैर हाथ सब कुछ सूज चुके थे आंखें अंदर धंस चुकी थी वहां आखँ खोल भी रहा था तब भी नहीं पता चल रहा था मगर जब वह होश में आया तो उन्हें देखते ही वह पागल की तरह रोने लगा उसे अंग्रेजी नहीं आती थी मगर एमी और रसूल का अंग्रेजी आती थी वह अपनी भाषा में बोलता रहा मगर यह दोनों को कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि यह




14 महीने से किसी से बात ही नहीं किया था

14 महीने से किसी से बात ही नहीं किया था और एमी और रसूल देखकर यह इतनी बातें करने लगा कि कंटिन्यू बातें करने लगा और समझ में नहीं आ रहा था इसकी कोई भी बात बोलने के बाद फिर बहुत हंसा फिर उसके बाद पुलिस आती है क्योंकि वह एक दूसरे देश पहुंचा था और कमाल यह है कि जहां से वह चला था और जहां पर वह उतरा दोनों की दूरी थी 8838 किलोमीटर इसके बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया यह बात वहां पर एक मार्शल आईलैंड पर एक अमेरिकन थे जिनको पता चली तो जा कर उससे मिले और उसे पूरी बात जान पूरी कहानी पूछी तो उसने बताया कि हम लोग के साथ ऐसे ऐसे हुआ फिर उसका इलाज हुआ वह ठीक हुआ फिर उसको उसके मेक्सिको शहर भेज दिया गया

जोश सल्वाडोर


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