बुधवार, 4 अगस्त 2021

पांच दोस्त की कहानी


पांच दोस्त :

 उन चारों को अचानक होटल में बैठा देख, रमेश हड़बड़ा गया । उसे सूझ नहीं रह था कि अब वो क्या करे ।मज़बूरी थी , कहीं छिप भी नहीं सकता था ।


लगभग 25 सालों बाद वे फिर उसके सामने थे लेकिन हालात बिलकुल बदल चुके थे ।

 शायद अब वो बहुत बड़े और संपन्न आदमी हो गये थे ।होटल के बाहर बड़ी चमचमाती गाड़ी लगी हुई थी ।

 रमेश को अपने स्कूल के दोस्तों के खाने का आर्डर लेकर परोसते समय बड़ा अटपटा लग रहा था ।उसे शर्म भी महसूस हो रही थी लेकिन बेचारा करे क्या ।

 उन चारों मे से दो लगातार अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त थे और दो लैपटाप पर ।





रमेश अपनी पढ़ाई पूरी नही कर पाया था।वह ग़रीब था ।

उन्होंने उसे पहचानने का प्रयास भी नही किया औऱ न ही रमेश से एक बार भी नज़र ही मिलाई,जैसा कि रमेश को महसूस हुआ ।

वे खाना खा कर, चुपचाप कैश काउंटर पर अपना बिल चुकाकर चले गये ।

 रमेश को ऐसा लगा , उन चारों ने शायद उसे पहचाना ही नहीं या उसकी गरीबी व लाचारी देखकर जानबूझ कर पहचानने की कोशिश ही नहीं की ।

उसने एक गहरी लंबी सांस ली और अपने हालात को कोसते हुए टेबल साफ करने में जुट गया ।


दोस्तों ने ज़िन्दगी बदल दी 

टिश्यु पेपर उठाकर वह कचरे में डालने ही वाला था कि कुछ देखकर रुक गया ।




शायद उन्होने उस पर कुछ जोड़-घटाव किया था ।

अचानक उसकी नजर उस पर लिखे हुये कुछ शब्दों पर पड़ी ।

उस पर लिखा था - " अबे साले, तू हमें खाना खिला रहा था तो तुझे क्या लगा, हम पहचानें नहीं ... साले इतना कमीना समझ रखा है क्या बे...? अबे 20 साल तो क्या तू अगले जनम में भी मिलता तो हम तुझे पहचान लेते ।लेकिन मेरे भाई , तुझे टिप देने की हिम्मत हममे नही हुई।
हमने बिलकुल पास ही फैक्ट्री के लिये ज़मीन ख़रीदी है।हमारा काम बहुत जोर शोर से चल रहा है और अब अक़्सर हमारा इधर आन-जाना तो लगा ही रहेगा ।लेकिन तू कान खोलकर सुन ले,आज तेरा इस होटल का आखरी दिन है । हमारे फैक्ट्री की कैंटीन कौन चलाएगा बे, तू चलायेगा ना ? तुझसे अच्छा पार्टनर और कहां मिलेगा हमें ??? याद हैं न स्कूल के दिनों में हम पांचो एक दुसरे का रोज टिफिन खा जाते थे । आज के बाद रोटी भी मिल बाँट कर साथ-साथ ही खाएंगें मेरे दोस्त । तू बिलकुल चिंता मत करना । कल सुबह हम फ़िर आएंगे तुझें लेने,तैयार रहना " ।

रमेश की आंखें भर आई.....औऱ वह रोने लगा ।
.......
आख़िर सच्चे दोस्त वही तो होते है जो अपने दोस्त की हालात औऱ कमजोरी नही बल्कि सिर्फ अपने दोस्त को देखकर ही खुश हो जाते है..........!!


कहीं अंधेरा तो कहीं शाम होगी...
मेरी हर ख़ुशी तेरे नाम होगी...
कभी मांग कर तो देख हमसे ऐ दोस्त...
होंठो पर हसीं और हथेली पर जान होगी...!!




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