गुरुवार, 29 जुलाई 2021

बिगड़ैल बादशाह और विश्वासपात्र सेवक





बिगड़ैल बादशाह:


एक राज्य में एक बड़ा ही बिगड़ैल बादशाह था। वो क़भी किसी की नहीं सुनता औऱ वो जो भी फैसला लेता वही अंतिम फैसला होता। वह अपने किसी सही गलत फैसले पर कभी पुनर्विचार नहीं करता ।

उसने अपने महल में बीस खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे।



उसके दरबारियों ,मंत्रियों अथवा प्रजा से जब कभी कोई मामूली सी भी गलती हो जाती तो वह उन्हें माफ़ नहीं करता बल्कि उल्टे दोषी व्यक्तियों को उन खूंखार कुत्तों के सामने फेंकवा देता।कुत्ते उस व्यक्ति को नोंच डालते ।

एक बार उसके एक विश्वासपात्र सेवक से एक छोटी सी भूल हो गयी....!

बादशाह को जब मालूम हुआ तो उसने गुस्से में उस सेवक को भी उन्हीं कुत्तों के सामने डालने का हुक्म सुना दिया।

सेवक बहुत रोने गिड़गिड़ाने लगा लेकिन बादशाह पर उसका कोई असर न हुआ ।

अंत में उस सेवक ने बादशाह को अपने बीस साल की सेवा व वफ़ादारी का वास्ता दिया....मगर पागल बादशाह ने उसकी एक न सुनी।उसका हृदय न पिघला ।

अंतिम इच्छा के तौर पर पंद्रह दिन की मोहलत :

फिर उस सेवक ने अपने लिए अंतिम इच्छा के तौर पर बादशाह से पंद्रह दिन की मोहलत माँगी जो उसे किसी तरह दे दी गई।

सेवक बहुत उदास रहने लगा क्योंकि वो जानता था कि पंद्रह दिन बाद वह शायद जिंदा नहीं बच पाएगा ।

बहुत विचार करने के बाद वह सेवक राजमहल में उन खूंखार कुत्तों के रखवाले के पास गया और उससे विनती की कि वह उसे सिर्फ़ पंद्रह दिन के लिए अपने साथ काम करने का अवसर दे।

किस्मत उसके साथ थी, उस रखवाले ने उसे अपने साथ रख लिया।

पंद्रह दिनों तक उसने उन खूंखार कुत्तों को खूब खिलाया, पिलाया, नहलाया, सहलाया और खूब सेवा औऱ प्यार किया।




आखिरकार फैसले का दिन आया औऱ सभी दरबार में हाज़िर हुए ।

सेवक डर के मारे थरथर कांप रहा था ।लोगों की हुज़ूम जमा हो चुकी थी।बादशाह के अगले आदेश का सबको इंतज़ार था कि आख़िर अब आगे क्या होने वाला है ।

सारे दरबारी औऱ आमजन आश्चर्य भरी नज़रों से क़भी बादशाह को देख रहे थे तो कभी उस सेवक को, तो फिर कभी उन खूंखार कुत्तों को ।

नतीजा:

नतीजा के लिए सब बेचैन ।

उसके बाद बादशाह ने अपने आदेश के मुताबिक उस सेवक को उन कुतों के सामने फेंक देने का हुक़्म दिया ।

सैनिकों ने आदेश पाकर उस सेवक को कुतों के सामने पटक दिया ।

लेकिन ये क्या...

वो खूंखार कुत्ते उस सेवक को चाटने लगे, उसके सामने दुम हिलाने और उसकी गोद में लोटने लगे।

बादशाह को बड़ा आश्चर्य हुआ।सभी हतप्रभ होकर इस दृश्य को देख रहे थे ।

बादशाह ने उस सेवक को अपने पास बुलाया और उन खूंखार कुत्तों का उसके प्रति इस प्रेम का कारण जानना चाहा ।

उसके पूछने पर उस सेवक ने बताया कि हुज़ूर... इन कुत्तों ने मेरी मात्र पंद्रह दिन की सेवा का इतना मान दिया औऱ मेरे प्रति वफ़ादार हो गए। लेकिन आपने मेरी वर्षों की सेवा को एक छोटी सी भूल के कारण भुला दिया।

बादशाह को तुरंत अपनी इस बड़ी गलती का अहसास हो 

गया...

और उसने उस आदमी को तुरंत 
भूखे मगरमच्छों के सामने फेंकवा दिया।

सीख:-

 बादशाह , सम्राट या राजा अर्थात सबसे ऊपरी ओहदे पर बैठे लोग संभवतः ख़ुद को हमेशा सही समझते हैं औऱ उनके किसी भी फ़ैसले पर कभी भी कोई सवाल नहीं उठाया जा सकत साथ ही इनके सामने जो भी व्यक्ति स्वयं को बड़ा चालाक ,काबिल या तीसमारखाँ समझता है , वो मूर्ख है

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