ऐसा ही कुछ हुआ था 48 साल पहले अमेरिका में. जब एक आदमी आसमान में ही गायब हो गया और उसका रहस्य आज भी वैसा ही बना हुआ है.
कौन थे डी.बी. कूपर?
कहानी 24 नवंबर, 1971 को शुरू होती है, जब खुद को डैन कूपर कहने वाले एक व्यक्ति ने पोर्टलैंड, ओरेगन से सिएटल के लिए एकतरफा टिकट खरीदा। एफबीआई ने उन्हें "एक शांत व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, जो एक काले रंग की टाई और सफेद शर्ट के साथ एक बिजनेस सूट पहने हुए, हाथ में काले रंग का बैग था एयरपोर्ट उसने अपना नाम डैन कूपर बताया. लेकिन उसका नाम ये नहीं था, लेकिन लोग आज भी उसे डीबी कपूर के नाम से जानते हैं.
टिकट लेने के बाद वह शख्स फ्लाइट की ओर चला गया. उसके विमान का नाम बोइंग 727 था वह सीधे जाकर अपनी सीट पर बैठ गया
. बाकी यात्रियों की तरह उसने अपना बैग ऊपर ना रखकर अपने पास ही रखा.विमान ने जैसे ही एयरपोर्ट से उड़ान भरी डीबी कूपर ने अपना काम शुरू कर दिया. जब उड़ान बीच में थी कूपर ने फ्लाइट अटेंडेंट को एक कागज का टुकड़ा दिया.अटेंडेंट ने उस कागज को ले लिया, लेकिन उसे पढ़ते ही वो सन्न रह गई.उसमे लिखा था 'मेरे पास बम है'.उसने बताया कि उसे पायलट को दिखाने से पहले तुम मेरे पास बैठो। वो उसके पास बैठी उसने अपना सूटकेस खोल के दिखाया उसमे बम था इसके बाद कूपर ने उसे अपनी सारी शर्तें बताई और कहा कि विमान को नजदीकी एयरपोर्ट पर लैंड कराया जाए और उसमें फिर से ईंधन भरा जाए. इसके साथ ही उसने दो लाख डॉलर (वर्तमान में करीब एक करोड़ 36 लाख रुपये) और चार पैराशूट की मांग की.
उसके बाद फ्लाइट अटेंडेंट सीधे पायलट के पास पहुंची और उसे सारी बात बताई. इसके बाद पायलट ने तुरंत विमान हाइजैक और कूपर की मांगों के बारे में सिएटल के एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना दी. उसके बाद हर तरफ अफरातफरी मच गई. इसकी सूचना पुलिस और एफबीआई को भी दी गई.
यात्रियों की जान पर खतरा मंडराता देख अमेरिकी सरकार ने उसकी सभी मांगे मान ली. और और दो लाख डॉलर से भरे बैग उसके पास विमान में पहुंचा दिए गए, लेकिन उससे पहले एफबीआई ने उन नोटों के नंबर नोट कर लिए, ताकि हाइजैकर को पकड़ा जा सके.
विमान फिर सिएटल में उतरा जहां अपहरणकर्ता ने पैसे और पैराशूट के बदले सभी यात्रियों को मुक्त कर दिया सरकार ने जब कूपर की सारी मांगें पूरी कर दीं तो उसने पायलट को विमान उड़ाने के लिए कहा. रात का समय करीब 8 बेज रहेथे था और उसने पायलट को विमान मैक्सिको ले जाने के लिए कहा. उधर, अमेरिकी एयरफोर्स ने भी अपने दो विमान उसके पीछे लगा दिए. ताकि लैंडिंग के वक्त कूपर को पकड़ा जा सके.जब विमान हवा में था तभी कपूर ने फ्लाइट मेंबर जो थे उन्हें कॉकपिट में जाने को कहा साथ ही हिदायत दी कि अंदर से दरबाजा बंद कर लिया जाए. इसके थोड़ी ही देर के बाद पायलट को विमान में हवा के दबाव में फर्क महसूस हुआ. जब को-पायलट ने बाहर जाकर देखा तो विमान का दरवाजा खुला हुआ था. उसने तुरंत जाकर दरवाजा बंद किया और कूपर को पूरे विमान के अंदर ढूंढा, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला. वह हवा में ही विमान से नीचे कूद चुका था फ्लाइट रेनो, नेवादा पहुंचने से पहले, कूपर पैराशूट और हाथ में पैसे लेकर विमान से बाहर कूद गया। विमान अंततः रेनो में सुरक्षित उतर गया। एयरपोर्ट पर उतरने के बाद विमान को चारों तरफ से घेर लिया. हर किसी को उम्मीद थी कि कपूर को पकड़ लिया जाएगा. लेकिन वह आसमान में विमान से फरार हो चुका था. हर कोई यह जानकर हैरान था कि आखिर कूपर ने ऐसा कब किया. यहां तक कि उस विमान के साथ-साथ चल रहे अमेरिकी एयरफोर्स के विमानों के पायलटों को भी इसके बारे में कुछ पता नहीं चला.मामले को "एफबीआई के इतिहास के महान अनसुलझे रहस्यों में से एक" के रूप में करार दिया गया है,





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