शुक्रवार, 9 जुलाई 2021

क्या 99 क़त्ल के लिये उसने कुआं बनवाया था





 यह रहस्यमयी कुआं मौजूद है बिहार राज्य के पटना शहर में, जिसका निर्माण सम्राट अशोक के काल के दौरान करवाया गया था। इस कुएं का नाम है 'अगम कुआं'। पुरातत्व विभाग की पड़ताल के बाद इस कुएं के विषय में जो भी पता चला वो काफी चौका देने वाला था। आज की तुलना में उस दौरान 20 फीट की खुदाई पर ही पानी निकल आता था, लेकिन इस कुएं की गहराई 105 फीट बताई जाती है।आखिर इतने गहरे कुएं की खुदाई के पीछे क्या कारण रहा होगा? बहुतों का मानना है कि इसमें सम्राट अशोक का गुप्त खजाना रखा जाता था। 

बिहार के इस प्राचीन कुएं से कई अनोखी बातें जुड़ी हैं जो इस कुएं को रहस्यमयी बनाने का काम करती हैं। कहा जाता है कि सम्राट अशोक ने अपने 99 भाइयों को मारकर इसी कुएं में फिकवां दिया था। जबकि बहुतों का मानना है कि यह कुआं सम्राट अशोक के गुप्त खजाने को रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि इस कुएं की असल सच्चाई अभी भी एक रहस्य बनी हुई है। इन सबसे अगल इस रहस्यमयी कुएं की एक बात सबके कान खड़े कर देती है। कि यह कुआं कभी नहीं सूखता।इस कुएं का निर्माण 273-232 ईस्वी में कराया गया था। कहा जाता है कि इस कुएं का पानी रंग भी बदलता है।





सम्राट अशोक के वक्त के इस कुएं के रहस्य को जानने की तीन बार कोशिशें की जा चुकी हैं। सबसे पहले 1932 में, दूसरी बार 1962 में और तीसरी बार 1995 में, मगर आज भी ये एक पहेली बना हुआ है। कहा जाता है कि कई बार भयंकर सूखा पड़ने के बावजूद इसका पानी कभी नहीं सूखा। न ही बाढ़ आने पर इसके पानी में कोई खास बढ़ोतरी हुई। कुएं की एक और खासियत ये है कि इसके पानी का रंग बदलता रहता है। इसमें पानी का लेवेल गर्मी में अपने सामान्य लेवल से सिर्फ एक से डेढ़ फीट नीचे जाता है। वहीं, बारिश के दिनों में भी पानी का लेवेल सामान्य से केवल एक से डेढ़ फीट तक ऊपर आता है।

कुएं के कभी न सूखने के पीछे ये तर्क दिया जाता है कि यह पश्चिम बंगाल स्थित गंगा सागर से जुड़ा है। एक बार एक अंग्रेज की छड़ी गंगा सागर में गिर गई थी जो बहते-बहते पाटलिपुत्र स्थित इस कुएं के ऊपर आकर तैर रही थी, आज भी वो छड़ी कोलकाता के म्यूजियम में रखी हुई है।

बता दें कि इस कुएं के नाम 'अगम' का शाब्दिक अर्थ है पाताल, यानी पाताल से जुड़ा हुआ कुआं। कहा जाता है कि इस कुएं के अंदर और भी कई कुएं मौजूद हैं, 9 श्रृंखलाबद्ध और बाद में छोटे-छोटे कुएं। जानकारों का मानना है कि कुएं के सबसे अंत में एक गुप्त तहखाना है जहां सम्राट अशोक का खजाना गढ़ा है। कहा जाता है इस तहखाने से कई गुप्त सुरंगे बाहर की और जाती थीं। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है इस विषय में कोई सटीक प्रमाण नहीं मिलता।

कुएं की खोज का श्रेय ब्रिटिश खोजकर्ता लौरेंस वाडेल को जाता है। खोजकर्ता वाडेल ने इस बात का उल्लेख किया है कि उस समय जब भी कोई धनी मुस्लिम व्यक्ति पाटलीपुत्र आया करता था तो वह इस कुएं में सोने-चांदी के सिक्के डालता था। इसके अलावा डकैत भी अपना काम में सफलता पाने के बाद इस कुएं में कुछ डाला करते थे। माना जाता है कि जब इस कुएं की खोज की गई तो आसपास कई मूर्तियां मौजूद थीं।

कुएं के पास मां शीतला का मंदिर स्थापित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुएं की पूजा के बाद ही मां शीतला की पूजा की जाती है। यहां रोजाना कई भक्त मां शीतला के दर्शन के लिए आते हैं। इस कुएं में भक्तों द्वारा चढ़ावा भी चढ़ाया जाता है। कहा जाता है कि इस कुएं का जल चेचक बीमारी  को दूर करता है। 







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