नई दिल्ली देश का एक इलाका ऐसा भी है, जहां भूत के डर के चलते 42 साल तक रेल सेवा नहीं पहुंची थी। पं. बंगाल की राजधानी कोलकाता से 260 किमी दूर बेगनकोडार स्टेशन पर सफेद साड़ी पहने एक महिला के भूत का इस कदर खौफ था। इसके चलते यहां सन्नाटा छाया रहता था। न सवारी न कोई ट्रेन। लेकिन जब सितंबर 2009 में यहां सबसे पहले रांची-हटिया एक्सप्रेस का हाल्ट तय हुआ, तो इलाके के लोगों में डर खत्म हुआ।
इस स्टेशन को 1962 में बनाया गया था। कुछ समय तक सब कुछ ठीक रहा, लेकिन 1967 में यहां के लोगों ने भूत देखे जाने का दावा किया, जिसके बाद यह स्टेशन सुनसान रहने लगा।ऐसा माना जाता है कि यहां एक औरत की आत्मा प्लेटफॉर्म पर नाचती है और साथ ही ट्रेक पर दौड़ती दिखाई देती है।
इसलिए यह रेलवे स्टेशन पिछले कई सालों से बंद पड़ा हुआ है।यहां के लोगों की बात माने तो वर्ष 1967 में एक रेलवे कर्मचारी महोने नाम का था जिसकी पोस्टिंग होई थी मोहने ने 4 5 दिन ये नज़ारा देखते है की एक लड़की ट्रेन के साथ दौड़ती और जब ज़ादा खुश होती तो ट्रेन के आगे नाचती, मोहने ने स्टेशन के कर्मचारी से बताते है और 2 दिन के बाद उनकी मौत हो जाती है
रेलवे फिर एक कर्मचरी की पोस्टिंग करती है तो उसको मोहने की बात का पता चलता है वो भी छोड़ के भाग जाता है रेलवे 3 कर्मचरी की पोस्टिंग करती है और वो भी भाग जाता है कोई भी टिकता नहीं धीरे -धीरे उस स्टेशन से सभी कर्मचरी भाग जाते है फिर रेलवे ने स्टेशन पे ट्रेन रोकना बंद कर दिया
कोलकाता की एक सशंटिस्ट टीम 11 लोगो की ये फैसला करती है की वह जायेगे और चेक करेंगे की सही क्या है वो टीम वह जाती है और 2 रोक कर पूरी जांच करती है मगर कुछ भी नहीं मिलता वो मीडिया ,और रेलवे को ये जानकारी देती है वह कुछ भी नहीं अब है
साल 2009 में लगभग 42 साल बाद ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते इस स्टेशन को दोबारा खोला गया। सितंबर 2009 में यहां सबसे पहले रांची-हटिया एक्सप्रेस का हाल्ट तय हुआ, जिससे इलाके में लोगों के मन से डर कुछ हद तक कम हुआ।




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